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अगस्त, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

साजन

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 फिल्म 'साजन' के 29 साल पूरे होने पर माधुरी दीक्षित ने शेयर किया पोस्ट माधुरी दीक्षित, संजय दत्त और सलमान खान अभिनीत फिल्म 'साजन' के 29 साल पूरे होने पर माधुरी दीक्षित ने फिल्म से जुड़ी यादें ताजा करते हुए सोशल मीडिया पर फिल्म के एक सीन की तस्वीर फैंस के साथ साझा की है।

News

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  बिहार के भागलपुर जिले में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रेम-प्रसंग को लेकर 6 बच्चों की मां ने अपने पति को मौत के घाट उतार दिया।  वरदात को अंजाम देने में पत्नी के प्रेमी ने भी साथ प्लेया।  यह हैरान कर देने वाली घटना जिले के बबरगंज थाना क्षेत्र की है।  हालांकि पुलिस ने आरोपित पत्नी मीना देवी को गिरफ्तार कर लिया है।  वहीं आरोपित लव पुलिस की गिरफ्त से फरार चल रहा है, जिसकी तलाशबीन में पुलिस जुटी हुई है।

महाराणा प्रताप

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 हिंदू पंचाग में आज की तिथि यानी तारीख का अलग ही स्थान है,  क्योंकि इसका राष्ट्रप्रेम से संबंध है। राष्ट्र के प्रति दासों यानी कर्मज के बारे में भी बताती हैं।  आज भारत के महान सपूत और वीरों में सबसे ऊपर महाराज प्रताप की जयंती है।  महाराणा प्रताप का जन्म हिंदू पंचांग के अनुसार जयंती महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था।  और मेवाड़ में हिंदू तिथि के अनुसार महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाती है।  महाराज प्रताप का जन्म वर्ष 1540 में आरक्षित के कुंभलगढ़ में हुआ था।  सोलहवीं शताब्दी में महाराणा प्रताप ने मुगल बादशाह अकबर को चरण टक्कर दी थी।  महाराज प्रताप और अकबर के बीच बीत गया हल्दीघाट का युद्ध काफी चर्चित है, जोकि 1576 में नकली हो गया है।]  महाराणा प्रताप ने मुगलों की समन्वयता स्वीकार नहीं की थी।

मेवाड़ का राज़ वन्स

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 उस दुनिया की अजेय क़िले महल और अभेद्य दीवारें अब भी मौजूद हैं  जहाँ कभी मेवाड़ में गुहिल (सिसोदिया) राजवंश के राजा रत्न सिंह और महारानी पद्मिनी की सल्तनत थी।   अब उनकी विरासत और वंशज उस गुज़रे दौर की याद दिलाते रहते हैं।  उनमें कोई उद्योग व्यापार में है, कोई नौकरी पेशा है  और कोई कृषि व्यवसाय में है।  मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के मुखिया महेंद्र सिंह मेवाड़ कहते हैं, " हाँ, मैं पद्मिनी का वंशज हूँ।"  श्री मेवाड़ ने बीबीसी से कहा कि वे सिसोदिया राजवंश की सत्तर छठी पीढ़ी है।   उदयपुर के महाराणा भगवत सिंह के 1984 में निधन के बाद बड़े बेटे के रूप में महेंद्र सिंह की ताजपोशी हुई है।   इतिहासकार कहते हैं चित्तौड़ पर लगातार चलने के बाद मेवाड़ की राजधानी महाराणा उदय सिंह के जब चित्तौड़ से उदयपुर में स्थापित कर दी गई इतिहासकारों के मुताबिक पद्मिनी के वंशज मेवाड़ और अन्य स्थानों में फैले हैं।   इनमें उदयपुर का पूर्व राजघराना पद्मिनी का प्रत्यक्ष वंशज है।

राजपुताना शायरी

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 मेवाड़ राजपूत शायरी हिंदी  पानी और अपनी मर्यादा तोड़े तो समझो विनाश और, और राजपूत ने अपनी मर्यादा तोड़े तो समझो समझ सर्वनाश ... - यजय राजपूताना

तलवार

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 Prem  पंकज मिश्रा, चाकुलिया: 'चढ़ चेतक पर तलवार उठा रखता था भूतल पानी को, राणा प्रताप सिर काट करता था सफल जवानी को'। मुगल सम्राट अकबर के समक्ष आजीवन नहीं खिलने और उनकी विशाल सेना के खिलाफ लोहा लेकर अदम्य साहस व वीरता की मिसल पेश करनेवाले चित्तगढ़ के महानायक महाराज प्रताप को भला कौन नहीं जानता। इतिहास में उनका नाम स्वर्ण वर्ण में दर्ज है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि महाराणा प्रताप के साथ चित्तगढ़ छोड़कर निकले कई सिसोदिया राजपूतों के वंशज लगभग 450 साल बाद भी वापस चित्तगढ़ नहीं लौटे हैं। कहा जाता है कि तब तक उन्होंने शपथ ली थी कि जबतक महाराणा प्रताप मेवाड़ पर कब्जा नहीं कर रहे, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। वे आज भी अपना शपथ धारणाने को सपरिवार पूरे देश में घूमते-घूमते औजार बनाने और बेचने का काम करते हैं।देश के विभिन्न हिस्सों के लोग इन्हें बंजारा व लोहर बढ़ाईया के नाम से भी जानते हैं। लोहे के हथियार बनाने में ये बेहद उपयोगी होते हैं। कुल्हाड़ी, शेरी, चापड़ आदि बनाकर पट्टियाँ हैं। पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी इस काम में शामिल रहते हैं। ऐसे ही बंजारों की एक टोली इन दिनों...

रामगढ

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  एक जमाने में रामगढ़ बांध को जयपुर की लाइफलाइन कहा जाता था, लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है।  बदलते वक्त के साथ साथ बांध की तस्वीर और तिलदीर बदलती चली गई।  अब रामगढ बांध दिखाई देता है तो देता है, लेकिन पानी नहीं ।117 साल पुराने इस बांध का निर्माण जयपुर के महाराजा ने इसलिए करवाया था ताकि जयपुर की प्रजा को भरपूर पानी मिल सके।  लेकिन अब रामगढ बांधना बिल्कुल बेबस है।  हालांकि जयपुर में तेज बारिश के बाद  चार  फीट पानी तो आ गया, लेकिन अभी भी रामगढ बांध बेबस ही दिखाई दे रहा है।

मेवाड़ की पन्नाधाय बलिदान

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  मेवाड़ का इतिहास अपनी बलि, वीरता, पराक्रम और बलिदान के लिए जाना जाता है  इस भूमि पर कई वीर, वीरांगनाओं ने जन्म लिया है और इस मिट्टी की रक्षा के लिए लाखों ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं और इस धरा पर महाराणा प्रताप जैसे वीर और त्यागी राजाओं का जन्म हुआ जिसने अपनी मातृभूमि की रक्षा के प्रणति के जातितिर अपने राज पाठ और महलों का बलिदान कर दिया और जंगल में जाकर रहने लगे मेवाड़ के इतिहास में ऐसे ही एक वीरांगना भी हुई जिसने अपनी आत्मा को महा मानकर उसके निर्वहन के लिए किया। मनाया।  ।  ।  ।  किया।  अपने बेटे का भी बलिदान दे दिया इस वीरांगना का नाम पन्नाधाय था।  पन्नाधाय त्याग और बलिदान की पराकाष्ठा है पन्ना धाय के बलिदान से बड़ा बलिदान इस दुनिया में कुछ नहीं हो सकता है।

राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति

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  राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति अपने अलग-अलग रंगों के कारण विश्व भर में अपनी विशेष पहचान रखती है,  शौर्य, स्वाभिमान और लोक संस्कृति के रंगों से सरोबार इस राजस्थान का कण-कण अपनी अलग कहानी लिए हुए है।  इसी कड़ी से जुड़ा है अजनारगरी जैसलमेर का कुलधरा।  जी हां, यह वही गांव है, जिसे व्हकोस्क्रिप्टों की काल्पनिक घटनाओं से जोड़ कर हॉन्टेड विलेज का नाम दिया गया है।  आज हम इसी कुलधरा गांव के बारे में जानेंगे कि क्या यहां का वास्तविक इतिहास था, जिसकी वजह से कुलधरा गांव जैसलमेर में विशेष महत्व रखता था और क्या कारण रहा कि एक ही रात में कुलधरा जैसे  अस्सी चार  गांव खाली हो गए?

मेवाड़

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 मेवाड़  रेजिडेंट स्टेट में महाराणा उदयसिंह द्वारा बसा गए उदयपुर शहर को पूर्व का वेनिस और लड़कों का दर्जा जैसे नामों से भी बहुत जाता है।  झीलों, फूलों, फूलों और महलों से घिरे इस शहर को प्रकृति ने अद्भुत सौंदर्य से नवाज़ा है।  माना जाता है कि उदयसिंह ने मुगलों के हमलों से बचने के लिए इस शहर को बसाया था।  पर्यटकों के लिए इस शहर में सिटी पैलेस, पिछोला झील, फतेह सागर, जग मंदिर इत्यादि स्थल हैं।   उदयपुर को झीलों का शहर भी कहता है कि ज़लों के साथ दूर तक फैले रेगिस्तान का अनोखा संगम कहीं और देखने को नहीं मिलेगा।

कौन थीं रानी पद्मावती

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  कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास  12वीं और 13वीं   सदी में दिल्ली के सिंहासन पर दिल्ली सल्तनत का राज था। सुल्तान ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कई बार मेवाड़ पर आक्रमण किया। इन आक्रमणों में से एक आक्रमण अलाउदीन खिलजी ने सुंदर रानी पदमिनी Padmavati को पाने के लिए किया था। ये कहानी अलाउदीन के इतिहासकारों ने किताबों में लिखी थी, ताकि वो राजपूत प्रदेशों पर आक्रमण को सिद्ध कर सके। कुछ इतिहासकार इस कहानी को गलत बताते हैं, क्योंकि ये कहानी मुस्लिम सूत्रों ने राजपूत शौर्य को उत्तेजित करने के लिए लिखी गयी थी। आइये इसकी पूरी कहानी आपको बताते है।

मेवाड़ की रानी

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 भारतीय इतिहास में राजपुताने का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। यहां के रणबांकुरों ने देश, जाति, धर्म तथा स्वाधीनता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया। उनके इस त्याग पर संपूर्ण भारत को गर्व रहा है। वीरों की इस भूमि में राजपूतों के छोटे-बड़े अनेक राज्य रहे जिन्होंने भारत की स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। इन्हीं राज्यों में मेवाड़ का अपना एक विशिष्ट स्थान है जिसमें इतिहास के गौरव बप्पा रावल, खुमाण प्रथम महाराणा हम्मीर, महाराणा कुम्भा, महाराणा सांगा, उदयसिंह और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने जन्म लिया है।

राजा रानी

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 राजा रानी का अधूरा मिलन 

राजस्थानी वेषभूषा

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 राजस्थानी वेषभूषा धारण मारवाड़ की राजपूती ढ्रेष

राजस्थानी वेषभूषा

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