मेवाड़ का राज़ वन्स

 उस दुनिया की अजेय क़िले महल और अभेद्य दीवारें अब भी मौजूद हैं 

जहाँ कभी मेवाड़ में गुहिल (सिसोदिया) राजवंश के राजा रत्न सिंह और महारानी पद्मिनी की सल्तनत थी।

  अब उनकी विरासत और वंशज उस गुज़रे दौर की याद दिलाते रहते हैं।  उनमें कोई उद्योग व्यापार में है, कोई नौकरी पेशा है 

और कोई कृषि व्यवसाय में है।  मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के मुखिया महेंद्र सिंह मेवाड़ कहते हैं, "

हाँ, मैं पद्मिनी का वंशज हूँ।"  श्री मेवाड़ ने बीबीसी से कहा कि वे सिसोदिया राजवंश की सत्तर छठी पीढ़ी है। 

 उदयपुर के महाराणा भगवत सिंह के 1984 में निधन के बाद बड़े बेटे के रूप में महेंद्र सिंह की ताजपोशी हुई है।  

इतिहासकार कहते हैं चित्तौड़ पर लगातार चलने के बाद मेवाड़ की राजधानी महाराणा उदय सिंह के जब चित्तौड़ से उदयपुर में स्थापित कर दी गई

इतिहासकारों के मुताबिक पद्मिनी के वंशज मेवाड़ और अन्य स्थानों में फैले हैं।  

इनमें उदयपुर का पूर्व राजघराना पद्मिनी का प्रत्यक्ष वंशज है।

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